१०. रत्तिदिवससुत्तं
८४. ‘‘छहि, भिक्खवे, धम्मेहि समन्नागतस्स भिक्खुनो या रत्ति वा दिवसो वा आगच्छति हानियेव पाटिकङ्खा कुसलेसु धम्मेसु, नो वुद्धि. कतमेहि छहि? इध, भिक्खवे, भिक्खु महिच्छो होति, विघातवा, असन्तुट्ठो, इतरीतरचीवरपिण्डपातसेनासनगिलानप्पच्चयभेसज्जपरिक्खारेन, अस्सद्धो होति, दुस्सीलो होति, कुसीतो होति, मुट्ठस्सति होति, दुप्पञ्ञो होति. इमेहि खो, भिक्खवे, छहि धम्मेहि समन्नागतस्स भिक्खुनो या रत्ति वा दिवसो वा आगच्छति हानियेव पाटिकङ्खा कुसलेसु धम्मेसु, नो वुद्धि.
‘‘छहि, भिक्खवे, धम्मेहि समन्नागतस्स भिक्खुनो या रत्ति वा दिवसो वा आगच्छति वुद्धियेव पाटिकङ्खा कुसलेसु धम्मेसु, नो परिहानि. कतमेहि छहि? इध, भिक्खवे, भिक्खु न महिच्छो होति, अविघातवा, सन्तुट्ठो, इतरीतरचीवरपिण्डपातसेनासनगिलानप्पच्चयभेसज्जपरिक्खारेन, सद्धो होति, सीलवा होति, आरद्धवीरियो होति, सतिमा होति, पञ्ञवा होति. इमेहि खो, भिक्खवे, छहि धम्मेहि समन्नागतस्स भिक्खुनो या रत्ति वा दिवसो वा आगच्छति वुद्धियेव पाटिकङ्खा, कुसलेसु धम्मेसु नो परिहानी’’ति. दसमं.
अरहत्तवग्गो अट्ठमो. [ततियो (स्या. क.)]