३. सामणेरसुत्तं

२५३. [महाव. ८४] ‘‘पञ्चहि, भिक्खवे, धम्मेहि समन्नागतेन भिक्खुना सामणेरो उपट्ठापेतब्बो. कतमेहि पञ्चहि? इध, भिक्खवे, भिक्खु असेखेन सीलक्खन्धेन समन्नागतो होति; असेखेन समाधिक्खन्धेन… असेखेन पञ्ञाक्खन्धेन… असेखेन विमुत्तिक्खन्धेन… असेखेन विमुत्तिञाणदस्सनक्खन्धेन समन्नागतो होति. इमेहि खो, भिक्खवे, पञ्चहि धम्मेहि समन्नागतेन भिक्खुना सामणेरो उपट्ठापेतब्बो’’ति. ततियं.