३. रुक्खमूलिकसुत्तं
१८३. ‘‘पञ्चिमे, भिक्खवे, रुक्खमूलिका. कतमे पञ्च? मन्दत्ता मोमूहत्ता रुक्खमूलिको होति…पे… इदमत्थितंयेव निस्साय रुक्खमूलिको होति. इमे खो, भिक्खवे, पञ्च रुक्खमूलिका’’ति. ततियं.
१८३. ‘‘पञ्चिमे, भिक्खवे, रुक्खमूलिका. कतमे पञ्च? मन्दत्ता मोमूहत्ता रुक्खमूलिको होति…पे… इदमत्थितंयेव निस्साय रुक्खमूलिको होति. इमे खो, भिक्खवे, पञ्च रुक्खमूलिका’’ति. ततियं.