८. असेखसुत्तं
१०८. ‘‘पञ्चहि, भिक्खवे, धम्मेहि समन्नागतो भिक्खु आहुनेय्यो होति पाहुनेय्यो दक्खिणेय्यो…पे… अनुत्तरं पुञ्ञक्खेत्तं लोकस्स.
‘‘कतमेहि, पञ्चहि? इध, भिक्खवे, भिक्खु असेखेन सीलक्खन्धेन समन्नागतो होति, असेखेन समाधिक्खन्धेन समन्नागतो होति, असेखेन पञ्ञाक्खन्धेन समन्नागतो होति, असेखेन विमुत्तिक्खन्धेन समन्नागतो होति, असेखेन विमुत्तिञाणदस्सनक्खन्धेन समन्नागतो होति. इमेहि खो, भिक्खवे, पञ्चहि धम्मेहि समन्नागतो भिक्खु आहुनेय्यो होति…पे… अनुत्तरं पुञ्ञक्खेत्तं लोकस्सा’’ति. अट्ठमं.