२. दुतियचेतोविमुत्तिफलसुत्तं
७२. ‘‘पञ्चिमे, भिक्खवे, धम्मा भाविता बहुलीकता चेतोविमुत्तिफला च होन्ति चेतोविमुत्तिफलानिसंसा च, पञ्ञाविमुत्तिफला च होन्ति पञ्ञाविमुत्तिफलानिसंसा च. कतमे पञ्च? अनिच्चसञ्ञा, अनिच्चे दुक्खसञ्ञा, दुक्खे अनत्तसञ्ञा, पहानसञ्ञा, विरागसञ्ञा – इमे खो, भिक्खवे, पञ्च धम्मा भाविता बहुलीकता चेतोविमुत्तिफला च होन्ति चेतोविमुत्तिफलानिसंसा च, पञ्ञाविमुत्तिफला च होन्ति पञ्ञाविमुत्तिफलानिसंसा च. यतो खो, भिक्खवे, भिक्खु चेतोविमुत्तो च होति पञ्ञाविमुत्तो च – अयं वुच्चति, भिक्खवे, ‘भिक्खु उक्खित्तपलिघो इतिपि, संकिण्णपरिखो इतिपि, अब्बूळ्हेसिको इतिपि, निरग्गळो इतिपि, अरियो पन्नद्धजो पन्नभारो विसंयुत्तो इतिपि’’’.
‘‘कथञ्च, भिक्खवे, भिक्खु उक्खित्तपलिघो होति? इध, भिक्खवे, भिक्खुनो अविज्जा पहीना होति उच्छिन्नमूला तालावत्थुकता अनभावंकता आयतिं अनुप्पादधम्मा. एवं खो, भिक्खवे, भिक्खु उक्खित्तपलिघो होति.
‘‘कथञ्च, भिक्खवे, भिक्खु संकिण्णपरिखो होति? इध, भिक्खवे, भिक्खुनो पोनोभविको जातिसंसारो पहीनो होति उच्छिन्नमूलो तालावत्थुकतो अनभावंकतो आयतिं अनुप्पादधम्मो. एवं खो, भिक्खवे, भिक्खु संकिण्णपरिखो होति.
‘‘कथञ्च, भिक्खवे, भिक्खु अब्बूळ्हेसिको होति? इध, भिक्खवे, भिक्खुनो तण्हा पहीना होति उच्छिन्नमूला तालावत्थुकता अनभावंकता आयतिं अनुप्पादधम्मा. एवं खो, भिक्खवे, भिक्खु अब्बूळ्हेसिको होति.
‘‘कथञ्च, भिक्खवे, भिक्खु निरग्गळो होति? इध, भिक्खवे, भिक्खुनो पञ्चोरम्भागियानि संयोजनानि पहीनानि होन्ति उच्छिन्नमूलानि तालावत्थुकतानि अनभावंकतानि आयतिं अनुप्पादधम्मानि. एवं खो, भिक्खवे, भिक्खु निरग्गळो होति.
‘‘कथञ्च, भिक्खवे, भिक्खु अरियो पन्नद्धजो पन्नभारो विसंयुत्तो होति? इध, भिक्खवे, भिक्खुनो अस्मिमानो पहीनो होति उच्छिन्नमूलो तालावत्थुकतो अनभावंकतो आयतिं अनुप्पादधम्मो. एवं खो, भिक्खवे, भिक्खु अरियो पन्नद्धजो पन्नभारो विसंयुत्तो होती’’ति. दुतियं.