४. यथाभतसुत्तं
४. ‘‘पञ्चहि, भिक्खवे, धम्मेहि समन्नागतो भिक्खु यथाभतं निक्खित्तो एवं निरये. कतमेहि पञ्चहि? इध, भिक्खवे, भिक्खु अस्सद्धो होति, अहिरिको होति, अनोत्तप्पी होति, कुसीतो होति, दुप्पञ्ञो होति. इमेहि खो, भिक्खवे, पञ्चहि धम्मेहि समन्नागतो भिक्खु यथाभतं निक्खित्तो एवं निरये.
‘‘पञ्चहि, भिक्खवे, धम्मेहि समन्नागतो भिक्खु यथाभतं निक्खित्तो एवं सग्गे. कतमेहि पञ्चहि? इध, भिक्खवे, भिक्खु सद्धो होति, हिरीमा होति, ओत्तप्पी होति, आरद्धवीरियो होति, पञ्ञवा होति. इमेहि खो, भिक्खवे, पञ्चहि धम्मेहि समन्नागतो भिक्खु यथाभतं निक्खित्तो एवं सग्गे’’ति. चतुत्थं.