११. पठमअसेखसुत्तं

१११. अथ खो अञ्ञतरो भिक्खु येन भगवा तेनुपसङ्कमि; उपसङ्कमित्वा भगवन्तं अभिवादेत्वा एकमन्तं निसीदि. एकमन्तं निसिन्नो खो सो भिक्खु भगवन्तं एतदवोच –

‘‘‘असेखो असेखो’ति, भन्ते, वुच्चति. कित्तावता भन्ते, भिक्खु असेखो होती’’ति? ‘‘इध, भिक्खु, भिक्खु असेखाय सम्मादिट्ठिया समन्नागतो होति, असेखेन सम्मासङ्कप्पेन समन्नागतो होति, असेखाय सम्मावाचाय समन्नागतो होति, असेखेन सम्माकम्मन्तेन समन्नागतो होति, असेखेन सम्माआजीवेन समन्नागतो होति, असेखेन सम्मावायामेन समन्नागतो होति, असेखाय सम्मासतिया समन्नागतो होति, असेखेन सम्मासमाधिना समन्नागतो होति, असेखेन सम्माञाणेन समन्नागतो होति, असेखाय सम्माविमुत्तिया समन्नागतो होति. एवं खो, भिक्खु, भिक्खु असेखो होती’’ति. एकादसमं.